महिलाओं को किन बीमारियों का होता है अधिक खतरा?
बदलते जीवन परिवेश के चलते हर इंसान किसी न किसी तरह से बीमार है. कोई ऐसा नहीं है जो यह कह सके कि मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं. अक्सर बीमारियों के लक्षण नजर आते हैं, जिसके चलते यह पता चलता है कि हमें अमुक बीमारी है. लेकिन कुछ ऐसी बीमारियां होती हैं, जिनका कोई लक्षण नजर नहीं आता है, इन बीमारियों को साइलेंट किलर रोग के नाम से जाना जाता है. साइलेंट-किलर बीमारियों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है या फिर एकदम ना के बराबर लक्षण नजर आते हैं. लेकिन अगर आप इसका सही समय पर इलाज नहीं करवाते हैं तो ये उतनी ही जानलेवा और खतरनाक हो जाती हैं. कुछ ऐसी साइलेंट-किलर बीमारियां हैं जो खासकर महिलाओं में ज्यादा आम हैं. इसमें स्लीप एपनिया, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह और उच्च रक्तचाप आदि शामिल हैं. कुछ साइलेंट किलर बीमारियां ऐसी हैं जो पुरूषों की तुलना में महिलाओं पर अधिक प्रभाव डालती हैं.
यह है बीमारियां :-
एनीमिया : एनीमिया या आयरन की कमी एक ऐसी स्थिती है. जहां हमारे रक्त में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोषिकाओं की कमी हो जाती हैं. इसके लक्षणों में अत्यधिक थकान, पीली त्वचा, सिरदर्द, सीने में दर्द, सांस की तकलीफ, कमजोरी, भंगुर नाखून, भूख और असामान्य लालसा शामिल हैं. लगातार रक्तदान करने वालों, शाकाहारियों और बच्चों के साथ-साथ महिलाओं को मासिक धर्म और गर्भावस्था के दौरान खूर की कमी के कारण एनीमिया होने का अधिक खतरा होता है.
इलाज : आयरन युक्त भोजन जैसे खुबानी,आयरन-फोटिफाइड अनाज, मटर, बीन्स, समुद्री भोजन और पोल्ट्री का सेवन करके एनीमिया को रोका जा सकता है. विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने से हमारे शरीर में आयरन को अवशोषित करने की क्षमता भी बढ़ सकती है. आयरन की गंभीर कमी के मामले में, डाक्टर अपने रोगियों को आयरन सप्लीमेंट भी देते हैं.
स्लीप एपनिया : स्लीप एपनिया एक गंभीर स्लीप डिस ऑर्डर है जिसमें बार-बार सांस रूक जाती है और शुरू हो जाती है. यदि महिलाएं अधिक वनज वाली हैं या मेनोपाज से गुजर रही हैं. तो महिलाओं में स्लीप एपनिया के लक्षणों में सुबह का सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, नींद के दौरान हवा के लिए हांफना, जोर के खर्राटें लेना या दिन में अत्यधिक नींद आना शामिल है. स्लीप एपनिया ऑक्सीजन के स्तर में अचानक गिरावट का कारण बन सकता है. जो हृदय प्रणाली को तनाव देता है। यह आपके इंसुलिन प्रतिरोध और चयापचय सिंड्रोम के विकास के जोखिम को भी बढ़ा सकता है.
ओवेरियन कैंसर : ओवेरियन कैंसर से तात्पर्य उन कोशिकाओं के तेजी से विकास से है जो अंडाशय में बनती हैं. ये बीमारी हर साल भारत में करीब दस लाख महिलाओं को प्रभावित करती है. यह अक्सर तब तक पता नहीं चलता जब तक कि यह श्रोणि और पेट के भीतर फैल न जाए. आमतौर पर शुरूआती चरणों में इसका कोई लक्षण नहीं होता है और बाद के चरण में यह द्यातक हो जाता है. ओवेरियन कैंसर के लक्षणों में थकान, पीठ दर्द, कब्ज, बार-बार पेशाब आना, पेट फूलना या सूजन और तेजी से वजन कम होना शामिल हैं. इस कैंसर का सबसे ज्यादा होने का जोखिम वृद्ध महिलाओं, अधिक वजन वाली या मोटापे से ग्रस्त महिलाओं, एंडोमेट्रियोसिस वाली महिलाओं, कभी गर्भवती नहीं होने वाली महिलाओं और ओवेरियन कैंसर के पारिवारिक इतिहास वाली महिलाओं में अधिक होता है.
उच्च रक्तचाप : उच्च रक्तचाप दिल का दौरा, स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा सकता है. उच्च रक्तचाप के उपचार और रोकथाम में धूम्रपान न करना, नियमित व्यायाम करना और पौष्टिक और स्वस्थ भोजन करना शामिल है. बहुत बार उच्च रक्तचाप वाले लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है. भले ही उनका रक्तचाप खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ हो. महिलाओं में 50 की उम्र के बाद से उच्च रक्तचाप विकसित होने की संभावना होती है. जब आप अधिक वजन वाले होते हैं, तम्बाकू या धूम्रपान करते हैं, बहुत अधिक नमक खाते हैं, पर्याप्त पोटेशियम का सेवन नहीं करते हैं या बहुत अधिक शराब पीते है, तो आप में उच्च रक्तचाप होने का खतरा बढ़ जाता है.

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