नौतपा में लू और तेज धूप से बचने के लिए बरतें खास सावधानी
जेठ महीने के विशेष नक्षत्र 'नौतपा' के आगाज के साथ ही समूचे सूबे सहित देश के कई राज्यों में सूर्यदेव ने आग उगलना शुरू कर दिया है। सुबह ढलते ही सूरज की तीखी किरणें और झुलसाने वाली गर्म हवाएं (लू) आम जनजीवन को बेहाल कर रही हैं। पारे में लगातार हो रहे रिकॉर्डतोड़ इजाफे के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है।
मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, नौतपा की इस अवधि के दौरान पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी कम होने से किरणें बिल्कुल सीधी पड़ती हैं, जिसके चलते गर्मी का प्रकोप अपने उच्चतम स्तर (चरम) पर पहुंच जाता है। इस झुलसाने वाले मौसम में लू की चपेट में आने, शरीर में पानी की गंभीर कमी (डिहाइड्रेशन) और सनस्ट्रोक होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों को अपनी सेहत को लेकर अत्यधिक सावधानी और सतर्कता बरतने की ताकीद की है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक कोई अत्यंत आवश्यक कार्य न हो, तब तक चिलचिलाती धूप में निकलने से परहेज करें।
दोपहर 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे का वक्त क्यों है सबसे घातक?
इस साल नौतपा का प्रभाव 25 मई से शुरू होकर आगामी 2 जून तक अनवरत बना रहेगा, जिसके चलते अगले कुछ दिनों तक भीषण तपन का सामना करना पड़ेगा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, दोपहर के इन 5 घंटों में सौर विकिरण (UV रेज) और गर्म थपेड़ों की तीव्रता सबसे प्रचंड होती है, जो मानव शरीर की त्वचा और आंतरिक तंत्र को तत्काल नुकसान पहुंचा सकती है। इस समयावधि में अधिक देर तक खुले आसमान के नीचे रहने से चक्कर आना, अचानक बेहोशी और हीट स्ट्रोक जैसी आपातकालीन चिकित्सीय स्थितियां बन सकती हैं। विशेषकर गर्भवती महिलाओं, नौनिहालों, वृद्धों और पहले से बीमार चल रहे मरीजों को इस दौरान घरों के भीतर ही रहने की सलाह दी गई है।
नौतपा की इस मार से किन्हें है सबसे ज्यादा रिस्क?
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तपती धूप में मजदूरी और मैदानी काम करने वाले श्रमिक।
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दिनभर सड़कों पर रहने वाले डिलीवरी एजेंट्स और दोपहिया वाहन चालक।
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कोमल इम्युनिटी वाले छोटे बच्चे और बुजुर्ग व्यक्ति।
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हृदय रोग (हार्ट पेशेंट्स) और उच्च रक्तचाप (बीपी) से पीड़ित मरीज।
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दैनिक जीवन में पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने वाले लोग।
इन श्रेणियों में आने वाले लोगों के शरीर का थर्मोरेगुलेटरी सिस्टम (तापमान नियंत्रण तंत्र) जल्दी बिगड़ जाता है, जिससे वे लू के आसान शिकार बन जाते हैं।
शरीर में लू लगने के शुरुआती संकेत (लक्षण):
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सिर में असहनीय और तेज दर्द होना।
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आंखों के सामने अंधेरा छाना या चक्कर आना।
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शुरुआत में अत्यधिक पसीना आना या अचानक पसीना आना पूरी तरह बंद हो जाना।
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त्वचा का लाल और शरीर का तापमान तेजी से बढ़ना (तेज बुखार)।
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अत्यधिक शारीरिक शिथिलता, कमजोरी और लगातार उल्टी (जी मिचलाना)।
यदि किसी भी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत धूप से हटाकर छांव या वातानुकूलित (ठंडी) जगह पर लिटाएं। उसे ओआरएस (ORS) का घोल, ग्लूकोज या ठंडा पानी दें। स्थिति में सुधार न होने पर अविलंब नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
आहार का रखें खास ख्याल: क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी?
| इन चीजों का भरपूर सेवन करें (क्या खाएं) | इन चीजों का त्याग करें (क्या न खाएं) |
| पानी से भरपूर फल जैसे तरबूज, खीरा, ककड़ी, खरबूजा | अधिक मिर्च-मसालेदार और गरिष्ठ भोजन |
| इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर ताजा नारियल पानी | तली-भुनी चीजें, समोसे और जंक फूड |
| पेट को ठंडक देने वाली छाछ, लस्सी और ताजा दही | कैफीन युक्त पेय पदार्थ जैसे अत्यधिक चाय और कॉफी |
| शरीर का तापमान नियंत्रित रखने वाला नींबू पानी | मादक पदार्थ (शराब) और कृत्रिम मिठास वाली कोल्ड ड्रिंक्स |
जल ही जीवन है: खुद को हाइड्रेट रखना क्यों है अनिवार्य?
नौतपा की इस भीषण तपन में हमारे शरीर से पसीने के माध्यम से पानी और जरूरी लवण (सोडियम-पोटेशियम) बहुत तेजी से बाहर निकल जाते हैं। यदि इस कमी को तुरंत पूरा न किया जाए, तो रक्तचाप गिर सकता है और डिहाइड्रेशन के कारण अंग काम करना बंद कर सकते हैं। इससे निपटने का एकमात्र सरल उपाय यह है कि प्यास न लगने पर भी थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी पीते रहें। एक स्वस्थ वयस्क को इस मौसम में रोजाना कम से कम 8 से 10 बड़े गिलास (करीब 3 से 4 लीटर) पानी या तरल पदार्थों का सेवन अनिवार्य रूप से करना चाहिए।

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