संक्रमण के मामलों पर केरल सरकार की नजर, नियंत्रण में बताया हालात
तिरुवनंतपुरम। केरल में खतरनाक निपाह वायरस की दस्तक के बाद उपजे भय के माहौल के बीच राज्य प्रशासन ने राहत की खबर साझा की है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि निपाह से पीड़ित एकमात्र मरीज की स्थिति इस समय पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आए सभी संदिग्धों की मेडिकल जांच रिपोर्ट पूरी तरह निगेटिव पाई गई है। इसी दौरान राज्य के कुछ हिस्सों में शिगेला बैक्टीरिया के संक्रमण की शिकायतें भी दर्ज की गई हैं, परंतु सरकार ने आश्वस्त किया है कि इस बीमारी पर भी पूरी तरह काबू पा लिया गया है। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए पूरा स्वास्थ्य तंत्र मुस्तैद है और आमजन से सतर्कता बरतने की गुजारिश की जा रही है।
संपर्कों की रिपोर्ट आई निगेटिव, पुणे एनआईवी की जांच से मिली बड़ी राहत
स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन के अनुसार, निपाह वायरस से प्रभावित व्यक्ति की सेहत में निरंतर सुधार हो रहा है और डॉक्टरों की विशेष टीम उसकी देखरेख में जुटी है। मरीज की पहचान होने के बाद उसके संपर्क में आए दर्जनों लोगों को चिन्हित कर उनके शारीरिक नमूनों को तुरंत जांच के लिए पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) भेजा गया था। इन सभी नमूनों की जांच रिपोर्ट में निपाह के अंश नहीं मिले हैं, जिससे वायरस के सामुदायिक फैलाव (कम्युनिटी स्प्रेड) का खतरा फिलहाल टल गया है। हालांकि, चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि वायरस की जानलेवा प्रकृति को देखते हुए अगले कुछ हफ्तों तक कड़ी निगरानी जारी रखी जाएगी।
निपाह के साथ शिगेला का भी प्रकोप, सरकार ने कहा स्थिति पूरी तरह काबू में
घाती निपाह वायरस की चिंताओं के समानांतर ही केरल के तिरुवनंतपुरम और वायनाड सहित कुछ अन्य जिलों से शिगेला संक्रमण के छिटपुट मामले भी प्रकाश में आए थे। इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय रहते किए गए प्रभावी उपचार और एहतियाती कदमों की बदौलत शिगेला के प्रसार को सीमित कर दिया गया है। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि वर्तमान में राज्य के किसी भी हिस्से में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी कोई भयावह स्थिति नहीं है और चिकित्सा टीमें लगातार जमीनी स्तर पर हर छोटे-बड़े मामले पर पैनी नजर रख रही हैं।
चमगादड़ों से दूरी बनाने की हिदायत, अफवाहों से बचने की प्रशासनिक अपील
विषाणु वैज्ञानिकों के मुताबिक, मई से लेकर सितंबर तक की अवधि निपाह वायरस के प्रसार के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि यह एक जूनोटिक (जानवरों से इंसानों में फैलने वाला) वायरस है जो फलभक्षी चमगादड़ों (फ्रूट बैट्स) के जरिए फैलता है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने परामर्श जारी कर लोगों को चमगादड़ों के आवास स्थलों से दूर रहने, उनके द्वारा कुतरे गए फलों का सेवन न करने और संदिग्ध परिस्थिति में तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करने की सलाह दी है। इसके साथ ही, प्रशासन ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक खबरों और अफवाहों पर रोक लगाने के लिए लोगों से केवल आधिकारिक स्वास्थ्य बुलेटिन पर ही विश्वास करने का आग्रह किया है।

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