किसानों को जमीन के बदले मिलेगा दोगुना मुआवजा
मुरैना|कोटा से इटावा तक प्रस्तावित 404 किलोमीटर लंबे अटल प्रोग्रेस-वे को अब पुराने रूट अलाइनमेंट पर ही बनाने की दिशा में काम तेज हो गया है. राज्य सरकार के संकेत मिलने के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने मुरैना जिले के 90 गांवों में पहले से चिन्हित जमीन का दोबारा सत्यापन शुरू कर दिया है. इसके साथ ही श्योपुर के 48 और भिंड के 23 गांवों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है|
जमीन का दोबारा सत्यापन क्यों जरूरी
करीब तीन साल पहले जिन जमीनों को अधिग्रहण के लिए चिन्हित किया गया था, उनका फिर से सत्यापन इसलिए किया जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि इस दौरान कहीं जमीन का स्वामित्व बदला तो नहीं. सत्यापन के बाद किसानों के नाम, गांव और जमीन का विवरण सार्वजनिक किया जाएगा और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी|
दावे-आपत्ति के बाद मिलेगा मुआवजा
प्रशासन के अनुसार, दावे-आपत्तियों के निपटारे के बाद किसानों के बैंक खातों में मुआवजे की राशि सीधे ट्रांसफर की जाएगी. फिलहाल योजना के तहत कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा देने का प्रावधान है, जिसे लेकर किसान संगठनों ने असंतोष जताया है|
रूट बदलने पर हुआ था विरोध
साल 2020 में इस परियोजना का प्रारंभिक सर्वे हुआ था और जमीन अधिग्रहण की तैयारी चल रही थी. इसी बीच केंद्र सरकार ने रूट अलाइनमेंट बदल दिया, जिससे कई नए क्षेत्रों की जमीन प्रभावित होने लगी. इससे किसानों में नाराजगी बढ़ी और सबलगढ़ से पोरसा तक विरोध प्रदर्शन हुए. हालात को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अप्रैल 2023 में अधिग्रहण प्रक्रिया रोक दी थी|
तीन साल बाद फिर शुरू हुआ प्रोजेक्ट
करीब तीन साल तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद अब इस परियोजना को फिर से शुरू किया गया है. केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय की पहल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23,645 करोड़ रुपए की लागत से इस प्रोजेक्ट को पुराने रूट पर लागू करने के निर्देश दिए हैं|
पुराने रूट से किसानों को बड़ा फायदा
पुराने रूट अलाइनमेंट पर निर्माण होने से 90 गांवों के लगभग 2089 किसानों की 488 हेक्टेयर जमीन ही अधिग्रहित होगी. जबकि नए रूट में 96 गांवों के 14,137 किसानों की 935 हेक्टेयर से अधिक जमीन जाने की आशंका थी. इस फैसले से करीब 12 हजार किसानों की 450 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन बच जाएगी|
बीहड़ क्षेत्र को मिलेगा विकास का रास्ता
यह प्रोग्रेस-वे राजस्थान के कोटा से शुरू होकर श्योपुर, मुरैना और भिंड होते हुए उत्तर प्रदेश के इटावा तक पहुंचेगा. रास्ते में कई ऐसे गांव शामिल हैं जो चंबल के बीहड़ क्षेत्र में आते हैं और अब तक विकास से दूर रहे हैं. इस प्रोजेक्ट से इन इलाकों में कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. विटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है|

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