मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में लगातार भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखे हमले बोल रहे शिवसेना के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार के तेवर अब पूरी तरह से नरम पड़ गए हैं। मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हुई एक महत्वपूर्ण मुलाकात के बाद सत्तार ने बड़ा यू-टर्न ले लिया है। उन्होंने एलान किया है कि वे छत्रपति संभाजीनगर विधान परिषद चुनाव से अपने बेटे समीर सत्तार की उम्मीदवारी (नामांकन) वापस लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा से अपने सारे गिले-शिकवे दूर होने का दावा भी किया है। आपको बता दें कि इससे पहले उन्होंने शिवसेना के दोनों गुटों (शिंदे और उद्धव गुट) के एक होने का भी समर्थन किया था।

मुख्यमंत्री फडणवीस के आश्वासन के बाद बदला फैसला

अब्दुल सत्तार ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनके गृह जिले छत्रपति संभाजीनगर में भाजपा की तरफ से उन्हें जिस राजनीतिक उपेक्षा और दिक्कतों का सामना करना पड़ा था, वह भविष्य में कभी नहीं होगा। इसी भरोसे के बाद उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से बातचीत की और अपने बेटे का नाम वापस लेने का फैसला किया। सत्तार ने कहा कि जिले में निचले स्तर पर जो परेशानियां थीं, मुख्यमंत्री ने उन्हें आगे न होने की गारंटी दी है और वादा किया है कि यदि हमारी तरफ से भी कोई चूक होगी, तो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हमारे कान खींचेंगे।

विधान परिषद की एक सीट को लेकर शुरू हुआ था महासंग्राम

यह पूरा विवाद दरअसल छत्रपति संभाजीनगर विधान परिषद सीट को लेकर शुरू हुआ था, जो सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में भाजपा के हिस्से में आई है। भाजपा ने यहाँ से सुहास शिरसाट को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। इस फैसले से नाराज होकर अब्दुल सत्तार ने बगावती रुख अपनाते हुए अपने बेटे समीर सत्तार का निर्दलीय नामांकन दाखिल करवा दिया था। इसके बाद उन्होंने भाजपा के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया था और आरोप लगाया था कि गठबंधन में शिवसेना को खत्म करने की कोशिश की जा रही है, जो एक तरह का 'धीमा जहर' है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि अगर भाजपा का रवैया नहीं बदला, तो वे गठबंधन पर दोबारा विचार कर सकते हैं।

उद्धव गुट की तरफ से मिला था 'मातोश्री' आने का न्योता

सत्तार के इन तीखे तेवरों के बाद भाजपा और शिवसेना दोनों खेमों में खलबली मच गई थी। उनके बयानों को देखते हुए शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने चुटकी लेते हुए कहा था कि अगर सत्तार को अपनी गलती का पछतावा हो रहा है, तो उनके लिए 'मातोश्री' (उद्धव ठाकरे का आवास) के दरवाजे हमेशा खुले हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ, खुद शिवसेना प्रमुख व उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी सत्तार के इस बगावती और कड़वे बयानों पर गहरी नाराजगी जताई थी।

शीर्ष नेताओं के दखल से टली गठबंधन की बड़ी बगावत

मामले को बिगड़ता देख मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने खुद इस विवाद में दखल दिया और अब्दुल सत्तार को बातचीत के लिए बुलाया। इस बैठक के बाद सत्तार ने कहा कि उपमुख्यमंत्री शिंदे ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिवसेना के सभी छह विधायक और एक सांसद एकजुट होकर काम करें। सत्तार ने माना कि महायुति गठबंधन को मजबूत रखने के लिए सभी दलों को मिलकर आगे बढ़ना होगा। शीर्ष नेतृत्व के इस सूझबूझ भरे हस्तक्षेप के बाद छत्रपति संभाजीनगर विधान परिषद चुनाव में होने वाली एक बड़ी बगावत फिलहाल टल गई है।