TMC का दावा – उपराष्ट्रपति चुनाव में पैसों से प्रभावित हुआ मतदान
नई दिल्ली। देश के उप-राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आए कुछ ही दिन हुए हैं, लेकिन इस चुनाव को लेकर राजनीति का पारा अभी भी हाई है। अब इस पूरे मामले में एक और नया मोड़ आ गया है,पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बीजेपी पर एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला आरोप लगाया है। TMC का दावा है कि भारतीय जनता पार्टी ने उप-राष्ट्रपति चुनाव में वोट खरीदने के लिए 15 से 20 करोड़ रुपये प्रति सांसद खर्च किए।TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी ने लोगों के जनादेश को बाजार में बिकने वाली किसी वस्तु की तरह बना दिया है। उन्होंने कहा, “मैंने कुछ लोगों से बात की और मुझे पता चला कि बीजेपी ने वोट खरीदने के लिए हर सांसद पर 15 से 20 करोड़ रुपये खर्च किए। जो लोग लोगों के विश्वास और भावनाओं को बाजार की कमोडिटी की तरह बेच रहे हैं, वे मूर्खों की दुनिया में जी रहे हैं।
क्या कहते हैं चुनाव के आंकड़े?
इस चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को हरा दिया था।राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को 300 वोट चुनाव में कुल 767 सांसदों ने वोट डाले, जिनमें से 15 वोट अवैध घोषित कर दिए गए। TMC ने दावा किया कि उनके सभी 41 सांसदों ने विपक्ष के उम्मीदवार को वोट दिया।
क्रॉस-वोटिंग और ‘ऑपरेशन लोटस’ का जिक्र
अभिषेक बनर्जी ने स्वीकार किया कि इस बात की संभावना है कि कुछ सांसदों ने क्रॉस-वोटिंग की हो, यानी उन्होंने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर वोट दिया हो। उन्होंने कहा, “यह कहना मुश्किल है कि अवैध घोषित किए गए 15 वोट किस खेमे के थे। लेकिन अगर इन वोटों में से आधे-आधे भी बांटें, तो भी कुछ सांसदों ने क्रॉस-वोटिंग की होगी.” TMC ने बीजेपी पर केवल उप-राष्ट्रपति चुनाव में ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और झारखंड के पिछले विधानसभा चुनावों में भी पैसे का इस्तेमाल कर विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया। बनर्जी ने इस तरह की घटनाओं को “ऑपरेशन लोटस” का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं का मानना है कि वे पैसे के बल पर नेताओं को खरीद सकते हैं, लेकिन वे बंगाल के लोगों को नहीं खरीद सकते। यह आरोप-प्रत्यारोप का खेल भारतीय राजनीति में कोई नया नहीं है। लेकिन उप-राष्ट्रपति चुनाव जैसे महत्वपूर्ण पद को लेकर 20 करोड़ रुपये जैसे बड़ी रकम का आरोप लगना, कई सवाल खड़े करता है।

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