बस अड्डे पर मजदूरों का सैलाब; एक ही डर- देर की तो फिर सैकड़ों मील पैदल भूखे पेट जाना पड़ेगा

फिर से निकलने वाले ज्यादातर मजदूर बिहार, यूपी और झारखंड के
मुख्यमंत्री की अपील- ये छोटा लॉकडाउन, कोई दिल्ली छोड़कर न जाए

दिल्ली का आनंद विहार बस अड्डा। रात के 3 बजे हैं। एक बार फिर इतिहास जिंदा होकर सामने खड़ा है। हजारों की तादाद में मजदूर अपने सामान और परिवार के साथ इकट्ठा हो चुके हैं।

न दो गज की दूरी और न मास्क का बंधन। थी तो बस घर पहुंचने की हड़बड़ी। अपने ही अतीत से घबराए मजदूर बोरिया-बिस्तर समेटे कैब, बस और ट्रेन के इंतजार में खड़े हैं। आखिर कोरोना से बिगड़ते हालात के बाद सोमवार सुबह दिल्ली सरकार ने 6 दिन के लॉकडाउन की घोषणा जो कर दी है।

आखिर आप घर क्यों जाना चाहते हैं? जवाब में बिहार के खगड़िया के नन्नू सिंह कहते हैं, ‘मालिक ने कह दिया कि हालात ठीक नहीं हैं। घर निकल जाओ। अभी नहीं निकले तो फंस जाओगे।' बुलंदशहर के डेबरी गांव के पवन सिंह कहते हैं, ‘पिछले साल लॉकडाउन की वजह से घर जाने के बाद अभी तीन महीने पहले ही घर से लौटा था। काम-धंधा दोबारा शुरू करने की तैयारी कर रहा था। अभी जमना शुरू हुए ही थे कि फिर लॉकडाउन ने उखाड़ दिया।'

न बस है और न अभी टिकट हुआ है। न जाने कब तक इंतजार करना पड़े इसलिए बच्चों के साथ स्टेशन की जमीन को ही बिछौना बनाकर सो गए।

पिछले एक साल में गांव में क्या किया? इस पर पवन कहते हैं, ‘क्या करता? बचत को खत्म किया। खेती-पाती है नहीं, बुलंदशहर में कोई ऐसा काम मिलता नहीं। यहां खानपुर में गत्ते की फैक्ट्री में सुपरवाइजर था। 12 हजार रु. महीना सैलरी थी। बच्चे गांव के स्कूल में पढ़ते हैं। उन्हें पिछले साल फीस न भर पाने की वजह से निकालना पड़ा था। दोबारा उन्हें स्कूल में भर्ती करने की सोच ही रहे थे कि अब फिर लॉकडाउन।’

दिल्ली में 6 दिन के लॉकडाउन की घोषणा होने के कुछ घंटों के भीतर मजदूरों का सैलाब आनंद विहार बस टर्मिनस पर उमड़ पड़ा। रांची के ननखू साहू कहते हैं, ‘मैं फैक्ट्री में था, पता चला कि लॉकडाउन की घोषणा हुई है। मैंने घर में फोन किया, सामान बांधकर रखना मैं ऑटो लेकर आता हूं। घर निकलना है। और हम निकल पड़े।'

बस अड्डे पर मौजूद ज्यादातर मजदूर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के हैं। और दिल्ली के नरेला, किराड़ी, खिड़की, नांगलोई, लाल कुआं, त्रिलोकपुरी, सुल्तानपुरी, बवाना, पटपड़गंज, ओखला में रहते हैं।

लॉकडाउन के ऐलान के तुरंत बाद यूपी-बिहार के वर्कर्स ने अपना सामान बटोरा और सीधे बस, रेलवे स्टेशनों की ओर रवाना हो गए।

दिल्ली औपचारिक रूप से इस साल लॉकडाउन की घोषणा करने वाला पहला राज्य बना। हालांकि, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार शाम 5 बजे से इकट्ठी होने वाली भीड़ की तस्वीरें आने के बाद लोगों से दिल्ली छोड़कर न जाने की अपील की। लेकिन पिछले अनुभव से घबराए लोग कैब, बस या ट्रेन, जैसा जिसको साधन मिल रहा था वह राजधानी छोड़ने पर आमादा दिखा।

ज्यादातर मजदूर एक ही बात कह रहे थे कि पिछली बार हमें उम्मीद थी कि शायद स्थिति ठीक हो जाएगी। इंतजार करने की वजह से भूखों मरने की नौबत आ गई। हमें पैदल ही निकलना पड़ा। अगर फिर ट्रेन और बसें बंद हो गईं तो फिर निकलना मुश्किल हो जाएगा।

बसों के अलावा कुछ ऐसे भी हैं, जो साइकिलों पर सामान लादकर निकल पड़े हैं। बस का किराया बचेगा तो पैसे कुछ दिन घर चलाने के काम आएंगे।
बसों के अलावा कुछ ऐसे भी हैं, जो साइकिलों पर सामान लादकर निकल पड़े हैं। बस का किराया बचेगा तो पैसे कुछ दिन घर चलाने के काम आएंगे।
 

नाइट कर्फ्यू के बावजूद पुलिस भी नरम दिखी

आनंद विहार बस अड्डे में पुलिस भी रनम दिखी। कई पुलिस वाले मजदूरों को अलग-अलग शहरों को जा रही बसों को खोजने में मदद करते नजर आए। एक पुलिस वाले ने बताया, ‘पिछला अनुभव मजदूरों को डराने के लिए काफी है। ये अब दिल्ली के अपने घरों को वापस नहीं जाएंगे। तो इससे अच्छा है कि जहां जाना चाहते हैं, वहां के लिए हम उनकी मदद कर दें।'

मास्क न लगाने और दो गज की दूरी न फॉलो करने पर भी किसी का चालान नहीं काटा गया। पुलिस वालों का कहना था, ‘इतनी भीड़ में चालान काटना संभव नहीं।'

हजारों की भीड़ बस अड्डे पर जमा है। इतने मुसाफिरों के लिए एकसाथ बसों का इंतजाम मुश्किल है। ऐसे में लोगों के पास लंबे इंतजार के अलावा दूसरा रास्ता नहीं है।

मुख्यमंत्री बोले- ‘कोई दिल्ली न छोड़े, मैं हूं न'

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पलायन की आ रही तस्वीरें देखने के बाद मजदूरों से कहा, ‘मैं हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं कि आप लोग दिल्ली न छोड़ें। यह 6 दिन का छोटा सा लॉकडाउन है। मुझे पूरी उम्मीद है कि इसे आगे बढ़ाना नहीं पड़ेगा। कृपया दिल्ली न छोड़ें, सरकार आपकी देखभाल करेगी।

केजरीवाल ने कहा, लॉकडाउन के अलावा हमारे पास कोई रास्ता नहीं था

सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 6 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की। केजरीवाल ने कहा कि लॉकडाउन के अलावा हमारे पास कोई रास्ता नहीं था। दिल्ली में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 25,000 से ज्यादा मामले आए हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के समय का इस्तेमाल हम संसाधनों को जुटाने में करेंगे।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को खत लिखकर हालात के बारे में बताया

दिल्ली में बेकाबू होते कोरोना के मामले और संसाधनों की कमी को लेकर केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर दिल्ली की स्थिति से अवगत कराया। केजरीवाल ने खत में लिखा है, ‘दिल्ली में बेड्स और ऑक्सीजन की कमी है। इसलिए केंद्र दिल्ली की मदद करे।' मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि दिल्ली में कोरोना बेड्स और ऑक्सीजन की भारी कमी है। लगभग सभी आईसीयू बेड्स भरे हैं। आपकी मदद की जरूरत है।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने कहा- केंद्र की मदद से उबरेगी दिल्ली

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भास्कर को बताया कि ‘हमने केंद्र से ऑक्सीजन और मेडिसिन आपूर्ति के लिए मदद मांगी है। हमें उम्मीद है कि केंद्र पिछली बार की तरह इस बार भी मदद करेगा। उप राज्यपाल अनिल बैजल जी ने भी हमें आश्वासन दिया है।’