मुरैना। मध्य प्रदेश के चंबल अंचल के मुरैना जिले में बुनियादी विकास कार्यों और निर्माण की गुणवत्ता एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। जिले के बिंडवा गांव में क्वारी नदी पर महज दो वर्ष पूर्व निर्मित हुआ करोड़ों की लागत का पुल भरभरा कर ढहने की कगार पर पहुंच गया है। पुल के मुख्य ढांचे में गहरी और खतरनाक दरारें उभर आई हैं, जबकि पुल को जोड़ने वाली मुख्य एप्रोच रोड (संपर्क मार्ग) भी कई महत्वपूर्ण स्थानों पर बुरी तरह धंस चुकी है। वर्तमान में स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि यहाँ से गुजरने वाले हजारों राहगीरों, ग्रामीणों और भारी वाहन चालकों की जान हर वक्त दांव पर लगी रहती है।

पहली बारिश में ही उखड़ी ठेकेदार के डामर की परत, भ्रष्टाचार छिपाने की कोशिश नाकाम

स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी और ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुल निर्माण के एक साल के भीतर ही इसकी गुणवत्ता की पोल खुलने लगी थी और दीवारों में कट्स दिखने लगे थे। सड़क धंसने की शिकायत जब की गई, तो विभाग ने तकनीकी सुधार करने के बजाय ठेकेदार से सांठगांठ कर आनन-फानन में क्षतिग्रस्त सीसी सड़क के ऊपर डामर (एस्फाल्ट) की एक पतली परत बिछाकर लीपापोती कर दी। हालांकि, चालू मानसूनी सीजन की पहली ही तेज बारिश ने भ्रष्टाचार के इस डामर को पूरी तरह उखाड़ फेंका है, जिससे पूरी सड़क पर अब जानलेवा और गहरे गड्ढे उभर आए हैं।

सुरक्षा दीवारों में आई दरारों को सीमेंट से भरने का खेल, पलपुरा रपटे की दीवार भी ढही

भ्रष्टाचार का यह खेल यहीं नहीं थमा; पुल की सुरक्षा के लिए बनाई गई एप्रोच रोड की कंक्रीट की दीवारों में भी बड़ी-बड़ी और चौड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं। इन तकनीकी खामियों को तकनीकी रूप से दुरुस्त करने के बजाय मजदूरों के जरिए सीमेंट और रेत का लेप लगाकर दरारों को छिपाने का नाकाम प्रयास किया गया है। ग्रामीणों को पुख्ता आशंका है कि लगातार हो रही बारिश के कारण यह सुरक्षा दीवार किसी भी दिन जमींदोज हो सकती है। इसके साथ ही, पास के पलपुरा गांव में स्थित क्वारी नदी के रपटे (कॉजवे) की स्थिति भी अत्यंत जर्जर हो चुकी है, जिसकी एक सुरक्षात्मक दीवार पूरी तरह ढह चुकी है।

रेलिंग विहीन रपटे पर बढ़ा जलस्तर, जिम्मेदार विभाग की लापरवाही से कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना

बरसात के इस मौसम में क्वारी नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी अक्सर रपटे के ऊपर से बहने लगता है, जिससे जलभराव के कारण सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देते। सबसे बड़ी प्रशासनिक लापरवाही यह है कि इस खतरनाक रपटे के दोनों किनारों पर कोई सुरक्षा रेलिंग या बैरियर नहीं लगाया गया है। ऐसी स्थिति में यदि कोई वाहन असंतुलित होता है या कोई चालक ओवरटेक करने की कोशिश करता है, तो वाहन सीधे उफनती नदी में समा सकता है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) और सेतु निगम के अधीन ऐसे कई क्षतिग्रस्त पुल-पुलिया मौजूद हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसर किसी बड़े हादसे के इंतजार में मूकदर्शक बने बैठे हैं।

पीडब्ल्यूडी (PWD) की टीम करेगी तकनीकी जांच, दोषी पाए जाने पर ठेकेदार पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई

इस संवेदनशील और गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए मुरैना के जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) कमलेश कुमार भार्गव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बिंडवा पुल और संपर्क मार्ग की वर्तमान जर्जर स्थिति की तकनीकी जांच के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के वरिष्ठ अभियंताओं (इंजीनियर्स) की एक विशेष टीम को तुरंत मौके पर भेजा जा रहा है। सीईओ ने आश्वस्त किया कि यदि जांच रिपोर्ट में निर्माण कार्य गुणवत्ताहीन या एस्टीमेट के विपरीत पाया जाता है, तो न केवल संबंधित निर्माण ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और लापरवाही के मामले में नियमानुसार कड़ी दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।