महिलाओं से छेड़छाड़ पर वाटर पार्क में बवाल, देखते ही देखते हुआ खूनी संघर्ष
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी और इसके आसपास के इलाकों में गर्मियों के दौरान वॉटर पार्क और पूल पार्टी का चलन युवाओं और परिवारों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। विशेष रूप से नर्मदापुरम रोड और इंदौर हाईवे पर बने ये मनोरंजन केंद्र लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। लेकिन हाल ही में भोपाल के एक प्रमुख वॉटर पार्क से सामने आई घटना ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा के दावों के बीच ये स्थान अब असुरक्षित होते जा रहे हैं। मौज-मस्ती के लिए पहुंचे परिवारों के लिए रविवार का दिन एक खौफनाक अनुभव में बदल गया, जहां मामूली विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया।
महिलाओं से छेड़छाड़ और खूनी संघर्ष
रविवार को वीकेंड मनाने पहुंचे भोपाल के कुछ संभ्रांत परिवारों के साथ यहां बेहद शर्मनाक वाकया हुआ। वॉटर पार्क में मौजूद कुछ युवकों ने वहां आई महिलाओं और युवतियों के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। जब पीड़ित परिवारों ने इस बदतमीजी का विरोध किया, तो दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होने लगी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि वहां मारपीट शुरू हो गई। इस स्थिति को संभालने के बजाय वॉटर पार्क प्रबंधन की भूमिका भी संदिग्ध रही। बताया जा रहा है कि मैनेजमेंट ने झगड़ा शांत कराने के बजाय ग्रामीण क्षेत्र के बाउंसरों और सुरक्षा गार्डों को बुला लिया, जिन्होंने विवाद सुलझाने के बदले लोगों के साथ जमकर मारपीट की, जिससे पूरा माहौल खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया।
सुरक्षा नियमों की अनदेखी और लापरवाही
नर्मदापुरम रोड और इंदौर हाईवे पर संचालित होने वाले ये वॉटर पार्क अक्सर सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं। विशेष तौर पर महिला सुरक्षा को लेकर यहां कोई पुख्ता इंतजाम नहीं दिखे हैं। रविवार की इस घटना ने साफ कर दिया है कि इन मनोरंजन केंद्रों पर आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। भीड़भाड़ वाले दिनों में प्रबंधन का ध्यान केवल कमाई पर होता है, जबकि सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए उनके पास कोई ठोस कार्ययोजना नहीं होती। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन की ढिलाई के कारण इन संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
पुराने हादसों से भी नहीं लिया सबक
यह पहली बार नहीं है जब इस विशेष वॉटर पार्क में कोई गंभीर घटना हुई हो। गौरतलब है कि ठीक दो साल पहले भी इसी स्थान पर रविवार के दिन एक दर्दनाक हादसा हुआ था, जिसमें 9 साल के मासूम बच्चे आरुष की डूबने से मौत हो गई थी। भोपाल निवासी गौरव राजपूत का परिवार आज भी उस हादसे के सदमे से उबर नहीं पाया है। उस समय भी सुरक्षा मानकों और लाइफगार्ड्स की तैनाती को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। बावजूद इसके, प्रबंधन ने पुरानी गलतियों से कोई सबक नहीं लिया और अब ताजा मारपीट और छेड़छाड़ की घटना ने एक बार फिर इन वॉटर पार्कों की साख और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

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