बाबा बागनाथ मंदिर में ऐसी परंपरा, किसी के अंतिम संस्कार वाले दिन कुछ नहीं खाते भोलेनाथ
बागेश्वर: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बाबा बागनाथ मंदिर में एक अनूठी और संवेदनशील धार्मिक परंपरा निभाई जाती है। सरयू, गोमती और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्थित इस मंदिर के समीप बने श्मशान घाट में जब भी किसी का अंतिम संस्कार (शवदाह) हो रहा होता है, तब भगवान शिव को दाल-भात का नियमित भोग नहीं लगाया जाता है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल के अनुसार, भगवान शिव 'श्मशानवासी' हैं और आसपास शोक का माहौल होने पर उन्हें भोजन अर्पित करना उचित नहीं माना जाता। यदि पूरे दिन अंतिम संस्कार का सिलसिला चलता रहे, तो मंदिर में भोग की प्रक्रिया स्थगित रहती है, हालांकि नियमित आरती और दर्शन जारी रहते हैं। धार्मिक मर्यादा को बनाए रखने के लिए दिनभर के शोक के बाद रात की आरती में मिठाई का भोग लगाया जाता है। स्थानीय लोग इस परंपरा को कुमाऊं की गहरी संवेदना और संस्कृति का प्रतीक मानते हैं।

राशिफल 19 अप्रैल 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
विश्व धरोहर दिवस पर रायपुर में सजी विरासत की अनोखी झलक, संरक्षण पर विशेषज्ञों का मंथन
बंदूक से विकास की ओर: सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र की प्रेरक कहानी
उमरिया जिले की पूजा सिंह ने रची आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी
हमने सीवर सफाई के काम को चुनौती के रुप में स्वीकार किया है और हम बदलाव लाकर दिखाएंगे : ऊर्जा मंत्री तोमर
दिशा दर्शन भ्रमण आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर मिले दो प्रतिष्ठित पुरस्कार
राज्यमंत्री गौर का सख्त रुख: लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश
महतारी वंदन योजना से संवर रही पहाड़ी कोरवा परिवारों की तकदीर