जाति-आधारित चुनावी विश्लेषण पर रोक की मांग, आरएसएस ने जताई चिंता
चंडीगढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (अखिल भारतीय प्रतिनिधियों की सभा) की तीन-दिवसीय बैठक रविवार को संपन्न हो गई। इस बैठक में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करने और चुनावों के दौरान मतदाताओं के जनसांख्यिकीय आंकड़ों का जाति-आधारित विश्लेषण करने की प्रथा को रोकने का आह्वान किया गया।
आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा में मीडिया वालों से कहा कि संघ सामाजिक सद्भाव का समर्थन करता है और समाज को जाति के आधार पर बांटने की कोशिशों का विरोध करता है। होसबले ने मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक हालात के बीच केंद्र सरकार की कूटनीतिक कोशिशों की भी तारीफ की, और कहा कि संघ वैश्विक शांति और विकास का समर्थक है।
उन्होंने कहा कि आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने इस संगठन की स्थापना किसी खास समुदाय, धार्मिक संप्रदाय या पूजा-पद्धति का विरोध करने के इरादे से नहीं की थी।
उन्होंने कहा, पूजा-पद्धति और रीति-रिवाजों में अंतर से कोई बुनियादी फर्क नहीं पड़ता।
यह कहते हुए कि संगठन में सभी का स्वागत है, होसबले ने कहा, हम समाज की भलाई के लिए रचनात्मक काम में लगे किसी भी व्यक्ति को संघ का स्वयंसेवक (वॉलंटियर) मानते हैं।
संगठन की गतिविधियों के विस्तार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में संघ के काम में काफी बढ़ोतरी हुई है।

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