तिरुपति लड्डू विवाद में क्लीनचिट खबरों को लेकर TTD चेयरमैन ने बताई सच्चाई, जानिए क्या कहा ?
नई दिल्ली। तिरुपति में लड्डू प्रसाद (Laddu Prasad) में मिलावटी घी (Adulterated Ghee) के विवाद पर तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के अध्यक्ष बीआर नायडू ने कहा कि इस मामले में क्लीनचिट (Clean Chit) देने की खबर झूठी है। उन्होंने बताया कि यह केवल श्रद्धालुओं (Devotees) को भ्रमित करने के लिए फैलाया जा रहा है। नायडू ने कहा कि हिंदुओं के पवित्र मंदिर में इस तरह का मिलावटी प्रसाद बांटकर उनकी भावनाएं (Sentiments) आहत हुईं, और किसी को भी क्लीनचिट नहीं मिली है।
मीडिया से बातचीत में नायडू ने बताया
बीआर नायडू ने कहा कि वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी का इस्तेमाल किया गया था। अब लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है कि इस मामले में क्लीनचिट मिल गई है, जो पूरी तरह गलत है। SIT की चार्जशीट में स्पष्ट रूप से लिखा गया कि लड्डू में मिलावटी घी का प्रयोग हुआ था और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह किया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट नियमों का उल्लंघन किया और ऐसे कंपनियों को ठेका दिया जो योग्य नहीं थीं।
ठेका देने में बड़ी लापरवाही
नायडू ने बताया कि जिस कंपनी के पास गाय नहीं थी, दुग्ध उत्पादन का कोई जरिया नहीं था और शुद्ध घी बनाने की क्षमता भी नहीं थी, उसे ठेका दे दिया गया। इसके बाद टीटीडी ने कंपनी से 60 लाख किलो घी खरीदा, जिसकी कीमत 250 करोड़ रुपये थी। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की जांच में पता चला कि इस घी में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया गया। नायडू ने कहा कि इस घी से लगभग 20 करोड़ श्रीवरी लड्डू बनाए गए, और यह देश में मिलावट का सबसे बड़ा मामला है।
SIT ने क्या कहा?
SIT ने अपनी फाइनल चार्जशीट कोर्ट में दायर की और कहा कि इसमें जानवरों की चर्बी का उल्लेख नहीं था। इसके बाद वाईएसआरसीपी ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और डिप्टी CM पवन कल्याण पर आरोप लगाया कि दोनों मिलकर हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। चार्जशीट में कहा गया कि घी बनाने के लिए पाम तेल, पाम कर्नेल तेल और केमिकल एडिटिव्स का इस्तेमाल हुआ था, लेकिन जानवरों की चर्बी का कोई जिक्र नहीं था।
सीएम नायडू के आरोप
सितंबर 2024 में चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि जगन मोहन रेड्डी की सरकार के दौरान तिरुपति लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी वाले घी का इस्तेमाल किया जाता था। इस विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने SIT का गठन किया। इस मामले में उत्तराखंड की भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के डायरेक्टर पोमिल जैन और विपिन जैन को भी आरोपी बनाया गया। TDP का कहना है कि SIT की चार्जशीट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि घी मिलावटी था और इसमें एक भी बूंद भी शुद्ध घी का इस्तेमाल नहीं हुआ।

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