बजट सत्र हंगामेदार होने के संकेत, कांग्रेस मनरेगा, SIR और विदेश नीति को बनाएगी मुख्य मुद्दा
नई दिल्ली । बुधवार से शुरु हो रहे संसद (Parliament) का बजट सत्र (Budget Session) भी हंगामेदार रह सकता है। सत्र शुरू होने से ठीक पहले कांग्रेस (Congress) ने सरकार के खिलाफ तीखे टकराव के संकेत देते हुए साफ कर दिया है कि वह मनरेगा (MGNREGA), विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), विदेश नीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों को संसद में जोरशोर से उठाएगी, भले ही सरकार ने इन पर दोबारा चर्चा से इनकार कर दिया हो। यह फैसला मंगलवार को कांग्रेस संसदीय रणनीति समूह की बैठक में लिया गया, जो कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर हुई। बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
कांग्रेस के राज्यसभा में पार्टी नेता और मुख्य सचेतक नसीर हुसैन ने बैठक के बाद बताया कि बुधवार सुबह 10 बजे संसद भवन में मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में विपक्षी दलों की बैठक होगी, जिसमें बजट सत्र के दौरान साझा रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
मनरेगा सबसे बड़ा मुद्दा
नसीर हुसैन ने कहा कि बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा मनरेगा का रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के दौर में लागू इस योजना को हटाकर लाई गई ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (VB-G RAM G)’ पर सरकार जवाब देने से बच रही है। उन्होंने कहा, “मनरेगा को लेकर विस्तृत चर्चा हुई है और इसे बजट सत्र के पहले हिस्से में मजबूती से उठाया जाएगा।”
SIR को लेकर ‘भ्रम और अराजकता’ का आरोप
कांग्रेस ने SIR (Special Intensive Revision) को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा है। हुसैन के अनुसार, जमीनी रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस प्रक्रिया के कारण भ्रम और अव्यवस्था फैली है। उन्होंने इसे ‘वोट चोरी’ से जोड़ते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मुद्दा है। यदि SIR गलत तरीके से लागू किया गया तो 2003 के बाद हुए चुनावों की वैधता पर ही सवाल खड़े हो सकते हैं। इसलिए हम इसकी वापसी की मांग करेंगे।”
पर्यावरण और संघीय मुद्दे भी एजेंडे में
कांग्रेस ने बताया कि बजट सत्र में अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा, ग्रेट निकोबार परियोजना, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने, इंदौर और अहमदाबाद में दूषित पानी से हुई मौतों जैसे मुद्दे भी संसद में उठाए जाएंगे। नसीर हुसैन ने कहा कि मौजूदा समय में सबसे गंभीर चिंता का विषय भारत की विदेश नीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका भारत को रूसी तेल खरीदने पर धमका रहा है, और भारत पर शुल्क (टैरिफ) लगाए जा रहे हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि रुपये के गिरते मूल्य से MSME सेक्टर समेत कई आर्थिक क्षेत्र संकट में हैं।
सरकार का पलटवार
वहीं, सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष की मांगों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि “जब कोई कानून बन चुका है, तो उसे वापस नहीं लिया जा सकता।” SIR पर उन्होंने कहा कि पिछली संसद सत्र में चुनावी सुधारों पर लंबी बहस हो चुकी है और दोबारा चर्चा की मांग अनावश्यक है। UGC के समता विनियमों पर पूछे गए सवाल पर नसीर हुसैन ने कहा कि कांग्रेस जाति जनगणना की मांग कर रही है और ऐसे सभी मुद्दों का समाधान उसी के माध्यम से संभव है।
कौन-कौन रहे बैठक में शामिल
रणनीति बैठक में प्रमोद तिवारी, जयराम रमेश, पी. चिदंबरम, मणिकम टैगोर, तारीक अनवर, रजनी पाटिल, मनीष तिवारी और के. सुरेश शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेता शशि थरूर दुबई से लौट रहे होने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके, जिसकी जानकारी उन्होंने पहले ही पार्टी को दे दी थी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस और विपक्ष की यह आक्रामक रणनीति आने वाले बजट सत्र को हंगामेदार और टकरावपूर्ण बना सकती है। बता दें कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हो रहा है। 1 फरवरी को बजट पेश होना है। सत्र का पहला चरण 13 फरवरी को समाप्त होगा और दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा।

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