’5वीं तक सेब नहीं देखा’—शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान चर्चा में
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एमपी के कई बच्चों को मूल पोषण भी नहीं मिल पाता है. प्रदेश के 50 लाख बच्चे 5वीं कक्षा तक सेब नहीं देख पाते हैं, अंजीर तो जिंदगी में कभी भी नहीं देख पाते हैं. केंद्रीय मंत्री रविवार को भोपाल दौरे पर थे. मंत्री यहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आयोजित एक कार्यशाला में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने पोषण को लेकर ये बड़ी बात कही |
‘बच्चों को पोषण कौन देगा?’
भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेशन सेंटर में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वे पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहे हैं कि राज्य में करीब 1.5 करोड़ स्टूडेंट्स में से करीब 50 लाख बच्चों ने 5वीं क्लास तक सेब तक नहीं देखा होगा. उन्होंने आगे कहा कि कई बच्चे मार्केट में सेब जरूर देखते होंगे, लेकिन उन्हें इसे खाने का अवसर नहीं मिलता है. अंजीर जैसे फल तो उनकी जिंदगी में 10वीं के बाद भी ना आएं |
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि कई बच्चों को तब भी दूध नहीं है जब उन्हें इसकी ज्यादा जरूरत होती है. ये सोचने का विषय है, बच्चों की बढ़ती उम्र में उन्हें पोषण कौन देगा? समाज इस दिशा में क्या योगदान दे सकता है |
कोई अब्दुल कलाम निकल सकता है
कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद हुजूर से बीजेपी विधायक रामेश्वर और भोपाल दक्षिण पश्चिम से विधायक भगवानदास सबनानी की ओर देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हमारे मित्र रामेश्वर शर्मा बडे़-बडे़ भंडारे करते हैं. उन्होंने आगे कहा कि मैं उनसे निवेदन करता हूं कि इस बार आपकी विधानसभा में कम से कम सप्ताह में एक बार एक बच्चे को एक पीस अंजीर, 2 काजू और एक बेसन का लड्डू मिल जाए. शायद उसके न्यूट्रिशनल इंपैक्ट से कोई अब्दुल कलाम निकल सकता है. ये तो समाज का भी दायित्व है |

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