बूँदकुंवर का सपना हुआ साकार, अयोध्या में रामलला का दर्शन कर खुद को मानती है सौभाग्यशाली
रायपुर : उनहत्तर वर्षीय बूँदकुंवर का जीवन संघर्षों और उम्मीदों से भरा रहा है। पति के निधन के बाद उन्होंने अपने जीवन की डोर मजबूती से संभाली और अपने बेटे तथा बहू के साथ सादगीपूर्ण जीवन जीती रहीं। बूँदकुंवर हमेशा से यह इच्छा रखती थीं कि वे जीवन में एक बार भगवान श्रीराम के जन्मस्थली अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करें। लेकिन सीमित साधन और बुजुर्ग होने के कारण यह सपना अधूरा रह गया था। जब छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की जानकारी उनके गांव तक पहुँची, तो उनके भीतर एक नई आशा जगी।
बूंदकुंवर ने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के लिए आवेदन किया और योजना के तहत उनका चयन हुआ। उनके साथ सहयोगी पल्लवी और गीता भी यात्रा में थीं, जिन्होंने उनका पूरा सहयोग किया। सरकार की इस पहल के माध्यम से बूँदकुंवर ने गांव से बिलासपुर तक बस की, फिर बिलासपुर से अयोध्या तक रेल यात्रा की और अयोध्या धाम पहुंचीं। अयोध्या में भगवान रामलला के दर्शन कर लौटने के बाद वह गांव में अपनी यात्रा और सरकार की इस योजना की तारीफें करते नहीं थकती।
जटगा गांव की बूंदकुंवर ने बताया कि जब उन्होंने रामलला के दर्शन किए, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा मैंने कभी नहीं सोचा था कि अपने जीवन में भगवान रामलला के दर्शन कर पाऊंगी। सरकार ने जो अवसर दिया, उसके लिए मैं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का हृदय से आभारी हूं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपना खुद का घर भी बनवाया है। अब उनके पास सर पर पक्की छत है और मन में संतोष है कि सरकार की योजनाओं ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। उन्होंने बताया कि अभी बेटा-बहू के साथ गांव में रहती है। उन्हें महतारी वंदन योजना से भी हर माह एक हजार रूपए मिलते हैं। इस राशि का उपयोग वह अपने आवश्यक घरेलू कार्यों में खर्च करती है। गांव में अब बूँदकुंवर की कहानी गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। वह अपनी यादगार यात्रा के रोचक किस्सों को अक्सर किसी न किसी को बताती है।

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