चार दशक बाद भी नहीं खत्म हुई कानूनी लड़ाई, भोपाल गैस त्रासदी के आपराधिक मामले पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख”
जबलपुरः भोपाल गैस त्रासदी को हुए 40 साल हो गए हैं। लेकिन इससे जुड़े क्रिमिनल केस में अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं। इसमें अब भी देरी हो रही है। इस पर हाई कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। हाई कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है इन मामलों को प्राथमिकता से सुना जाए। साथ ही लोअर कोर्ट हर महीने की प्रोग्रेस रिपोर्ट हाई कोर्ट के प्रिसिंपल रजिस्ट्रार को भेजें। इसे मुख्य न्यायधीश के सामने पेश किया जाएगा। दरअसल, गैस त्रासदी मामले में लंबे समय से सुनवाई चल रही है। मामले में याचिका लगाने वाले वकील राजेश चंद ने चौंकाने वाली जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 7 जून 2010 के दिन भोपाल की सीजेएम (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) ने कई आरोपियों को सजा भी सुनाई गई थी। आरोपियों ने इस फैसले के खिलाफ भोपाल जिला न्यायालय में अपील दायर की थी। इसकी सुनवाई पिछले 15 साल से लंबित है। इस केस में सजा पाने वाले कई का निधन हो चुका है।
15 साल में नहीं नहीं दाखिल हुई चार्जशीट
सीजेएम के फैसले के खिलाफ जिला कोर्ट में चल रही सुनवाई में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। अक्टूबर, 2023 से कई आरोपी जिला अदालत में पेश हो रहे हैं। लेकिन अब तक इनके खिलाफ चार्जशीद दाखिल नहीं हुई है। न ही कोई ट्रायल शुरू हो पाया है।
अब देरी बर्दाश्त नहीं
हाईकोर्ट जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने इस देरी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मामले को 40 साल तक न्यायिक प्रक्रिया में लटकाए रखना स्वीकार्य नहीं है। हाई कोर्ट ने भोपाल ट्रायल कोर्ट को निर्देशित किया है कि लंबित मामलों तो तत्काल सुना जाए। साथ ही निचली अदालतें हर महीने की मासिक प्रोग्रेस हाई कोर्ट के प्रिसिंपल रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत करें।
डाउ कैमिकल केस में भी जताई नाराजगी
1984 गैस त्रासदी केस के साथ ही 1992 में डाउ कैमिकल पर केस लगाया गया था। 1992 में लगाई याचिका में डाउ कैमिकल को इस त्रासदी का जिम्मेदार बताने की मांग की गई थी। लेकिन मामला 33 सालों से ट्रायल कोर्ट में है। इस पर भी हाई कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अब और देरी नहीं की जाएगी। साथ ही शासन से इस पर जवाब मांगा।
शासन ने क्या दी सफाई
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से दलील दी गई कि सीबीआई जांच कर रही है। अब भी एक आपराधिक अपील और एक विविध आपराधिक मामला लंबित है। यह मामला दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के तहत आरोपियों को फरार घोषित करने के लिए दायर किया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया कि आरोपी अक्टूबर 2023 से अदालत में उपस्थित हो रहा है। फिर भी अब तक कोई आदेश पारित नहीं हुआ है। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी लगातार पेश हो रहे हैं, फिर अब तक आदेश क्यों नहीं दिया गया? इसके बाद कोर्ट ने 5 अक्तूबर तक सुनवाई स्थगित कर दी है। साथ ही सभी ट्रायल और जिला कोर्ट को निर्देश दिया है कि भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े केसों को अन्य सभी मामलों से ऊपर रखा जाए।
क्या है भोपाल गैस त्रासदी
दरअसल, 3 दिसंबर 1984 की रात भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस लीक हुई थी। इससे भारी जनहानि हुई थी। सरकारी आंकड़ों की माने तो करीब 5479 मौतें हुई थी। वहीं, 6 लाख लोग इस त्रासदी से प्रभावित हुए थे। इस त्रासदी के खिलाफ पिछले 40 सालों से कोर्ट में सुनवाई चल रही है। लेकिन कई आरोपियों तो सजा नहीं मिल पाई है।

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