भाजपा में बढ़ता असंतोष, गडकरी और अंबानी कर सकते बड़ा खेल
नई दिल्ली । भाजपा के भीतर असंतोष की आंच अब खुलकर सामने आने लगी है और पार्टी में सत्ता संघर्ष की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी असंतुष्ट खेमे के संभावित सरदार के रूप में उभर रहे हैं और करीब 100 से 125 सांसद उनके पक्ष में खड़े हो सकते हैं। पार्टी के गलियारों में इस संघर्ष में अंबानी फैक्टर की भूमिका को लेकर भी चर्चा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा दो ध्रुवों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की गुजरात लॉबी है, जबकि दूसरी ओर गडकरी का गुट है, जिन्हें संघ का करीबी माना जाता है और जिनके पीछे महाराष्ट्र और नागपुर की मजबूत पकड़ है। यही वजह है कि गडकरी की लोकप्रियता और संगठन में उनकी पकड़ पार्टी के अंदर नई हलचल पैदा कर रही है। गडकरी को कमजोर करने के लिए लगातार मीडिया में उनके खिलाफ नकारात्मक खबरें लीक कराई जा रही हैं। कभी सड़कों की महंगाई को लेकर सवाल उठते हैं, तो कभी एथेनॉल बिजनेस पर आरोप लगाए जाते हैं।
भाजपा में इस बात की चर्चा भी जोरों पर है। मुकेश अंबानी के पुत्र अन्नत अंबानी के वन्य तारा की जांच शुरू कराने से मुकेश अंबानी नाराज हैं। माना जाता है अंबानी समर्थक सांसदो की संख्या 80 से ऊपर है। उपराष्ट्रपति के चुनाव में अंबानी और गड़करी मिलकर कोई बड़ा खेल कर सकते हैं। मोदी-शाह और गौतम अडानी रिलायंस समूह के ऊपर दबाव बना रहे थे। विश्लेषकों का कहना है कि यह सब उनकी छवि को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है।
2014 और 2019 की जीत के बाद भाजपा अब नए दबाव का सामना कर रही है। 2024 के चुनावों के बाद से पार्टी की नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं, जिनमें नोटबंदी, जीएसटी और विदेश नीति प्रमुख मुद्दे हैं। पार्टी के भीतर यह आवाज बुलंद हो रही है कि अब बदलाव का वक्त आ गया है और मोदी-शाह को पीछे हटकर नए नेतृत्व को सामने लाना चाहिए। इस बीच, संघ की भूमिका भी अहम हो गई है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट किया है कि वे इस्तीफा नहीं देंगे बल्कि भीतर रहकर ही रणनीति बनाएंगे। लगातार हो रही गुप्त बैठकों और मुलाकातों से संकेत मिलता है कि पार्टी में बड़ा बदलाव संभव है।
भाजपा सूत्रों का मानना है कि आने वाले राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव पार्टी की आंतरिक राजनीति में निर्णायक साबित होंगे। यदि असंतोष को समय रहते संतुलित नहीं किया गया तो गुजरात बनाम नागपुर की खींचतान खुलकर सामने आ सकती है। एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अब पार्टी में शक्ति संतुलन की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है। उनके शब्दों में “इस बार एक शहीद होगा, या अंबानी या मोदी। आने वाले महीनों में तस्वीर साफ हो जाएगी।

ईंट निर्माण कार्य से आत्मनिर्भर बन रही हैं समूह की महिलाएं
महासंघ की कार्यप्रणाली को बनाये गतिशील एवं परिणामोन्मुख : राज्यमंत्री पंवार
प्रदेश में जंगली भैंसा प्रजाति का पुनर्स्थापन एक ऐतिहासिक अवसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
सही दवा-शुद्ध आहार' अभियान में जगदलपुर के चाट-गुपचुप सेंटरों और कॉस्मेटिक्स दुकानों का हुआ निरीक्षण
वन मंत्री केदार कश्यप ने भरा ऑनलाइन स्व-गणना पत्रक, नागरिकों से सहभागिता की अपील
एमपी टूरिज्म को मिला “लीडिंग टूरिज्म डेस्टीनेशन” का प्रतिष्ठित सम्मान
मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को दे रहा है नई ऊर्जा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
सुकमा में तेंदूपत्ता संग्रहण तेज़ी से जारी, 35 हजार से अधिक बोरे का हुआ संग्रहण
राजस्व कार्यों में ढिलाई पर सख्त:लंबित प्रकरणों के निपटारे और राजस्व वसूली में तेजी लाने मंत्री ने दिए निर्देश
अनुशंसाओं को संवेदनशीलता के साथ करें लागू : राज्यपाल पटेल