ट्रंप की भी नहीं सुन रहे नेतन्याहू: सीरिया के कई इलाकों पर इजरायल ने किया कब्जा
तेलअवीव। हमास से भिड़ने के साथ साथ इजरायल सीरिया से भी भिड़ गया है। इजरायल ने 60 सैनिक भेजकर सीरिया के कई इलाकों कब्जा कर लिया है। सीरिया के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि इजरायल ने माउंट हर्मोन के आसपास सीरियाई सीमा में घुसकर करीब 60 सैनिक भेजे और कई इलाकों पर कब्जा कर लिया। यही नहीं, इजरायली सैनिकों ने 6 सीरियाई नागरिकों को भी गिरफ्तार किया। इस बीच सीरिया के राष्ट्रपति ने अमेरिका से गुहार लगाई है। बताया ये भी जा रहा है कि इजरायल के पीएम नेतन्याहू इस वक्त यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी नहीं सुन रहे हैं।
सीरिया ने इस कार्रवाई को अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन और क्षेत्रीय शांति के लिए सीधा खतरा बताया है। विदेश मंत्रालय ने कड़े लहजे में कहा कि इजरायल का यह कदम खतरनाक बढ़ोतरी है। वहीं, इजरायल की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। घटना उस जगह हुई है जो लेबनान बॉर्डर के नजदीक है और हथियारों की तस्करी के लिए कुख्यात रही है। यहां से ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह और फिलीस्तीनी उग्रवादी धड़ों के लिए हथियारों का नेटवर्क चलता रहा है। यही वजह है कि इजरायल इस इलाके को अपनी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है। इजरायली सेना ने पिछले हफ्ते ही फुटेज जारी किया था, जिसमें दक्षिण सीरिया में हथियार भंडारण केंद्रों को खोजने का दावा किया गया था। इसके बाद सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शर्रा ने दमिश्क में अमेरिकी विशेष दूत थॉमस बैरक से मुलाकात की। राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के अनुसार, बातचीत में सीरिया और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई। इससे एक दिन पहले बैरक ने यरुशलम में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात कर सीरिया और लेबनान पर विचार-विमर्श किया था। अमेरिकी मध्यस्थता में सीरियाई और इजरायली अधिकारियों के बीच दक्षिण सीरिया में संघर्ष कम करने पर बातचीत चल रही है। यह कूटनीतिक गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता और तनाव घटाने की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।
महत्त्वपूर्ण बात यह है कि सीरिया और इजरायल के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में दक्षिण सीरिया में संघर्ष कम करने की बातचीत चल रही थी। दमिश्क को उम्मीद थी कि सुरक्षा समझौते के जरिये भविष्य में राजनीतिक बातचीत का रास्ता खुलेगा। लेकिन अब इजरायल की इस कार्रवाई से बातचीत पर बड़ा साया पड़ गया है। सीरिया का कहना है कि इजरायल ट्रंप प्रशासन से करीबी रिश्ते का फायदा उठाकर लगातार दखलअंदाजी कर रहा है। मगर यह दोस्ती भी सीरिया को कब्जे से नहीं बचा सकी।
इससे सीरिया की संप्रभुता को चुनौती मिली है। लेबनान और फिलीस्तीनी धड़ों के साथ तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका की मध्यस्थता से चल रही बातचीत पटरी से उतर सकती है। पहले से अस्थिर सीरिया में नया मोर्चा खुल सकता है। सीरिया और इजरायल के बीच यह टकराव केवल सीमा विवाद नहीं, बल्कि पूरे मध्यपूर्व की सुरक्षा और संतुलन से जुड़ा हुआ है। इजरायल का दावा है कि वह अपने लोगों और ड्रूज़ समुदाय को बचाने के लिए कार्रवाई कर रहा है, जबकि सीरिया इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है।

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