ईवी उत्पादन पर संकट! रेयर अर्थ की कमी से जूझ रही ऑटो इंडस्ट्री, चीन से सीधी बातचीत को तैयार भारतीय कंपनियां
चीन ने अप्रैल में सात रेयर अर्थ मटेरियल्स पर बैन लगा दिया. इसकी वजह से भारत सहित दुनियाभर में ऑटोमोबाइल प्रोडक्शन प्रभावित हो रहा है. चीन का कहना है कि जिन रेयर अर्थ मटेरिल्स के निर्यात पर बैन लगाया है, वे डुअल यूज वाले हैं. इनका उपयोग सिविल के साथ मिलिट्री पर्पज के लिए भी किया जा सकता है. ऐसे में चीन अप्रसार नियमों का पालन करते हुए सिर्फ उन्हें ही ये मटेरिल्स देगा, जो इनके सिविल उपयोग का भरोसा देंगे.
चीन जाएगा प्रतिनिधिमंडल
भारत के वाहन उद्योग का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही रेयर अर्थ मामले में चीन की सरकार से बात करने बीजिंग जाने वाला है. PTI की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि OEM और और वाहनों के कल-पुर्जे बनाने वाली कंपनियों के करीब 50 अधिकारियों के वीजा को चीन से मंजूरी मिल गई है. हालांकि, फिलहाल वे इस मामले में बैठक के लिए चीनी वाणिज्य मंत्रालय से हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं.
चीन ने क्या किया?
चीन सरकार ने 4 अप्रैल, 2025 को 7 रेयर अर्थ मटेरियल और दो मैग्नेट्स के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया. चीन का कहना है कि सात रेयर अर्थ मटेरियल के लिए विशेष लाइसेंस लेना अनिवार्य है. यह लाइसेंस उन्हें ही दिया जाएगा, जो इन मटेरियल्स का सिविल पर्पज के लिए एंड यूज का भरोसा दे पाएंगे. चीन असल में इन मटेरियल्स की 90 फीसदी प्रॉसेसिंग को कंट्रोल करता है.
सुजुकी पर हुआ असर
उद्योग सूत्रों का कहना है कि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी रेयर अर्थ मटेरियल्स की आपूर्ति में आए व्यवधान से प्रभावित हो रही हे. इसकी वजह से कंपनी की पहली प्योर इलेक्ट्रिक कार ई-विटारा का उत्पादन प्रभावित हो रहा है. यही वजह है कि कंपनी ने सितंबर तक मॉडल की अब सिर्फ 8,000 कार बनाने का लक्ष्य रखा है, जबकि पहले यह लक्ष्य 26,000 था.
किन मटेरियल पर लगा बैन?
चीन ने समैरियम, गैडोलीनियम, टेरबियम, डिस्प्रोसियम और ल्यूटेटियम पर बैन लगाया है. इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक मोटर, रिजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम, स्मार्टफोन सहित तमाम इलेक्ट्रिकल सिस्टम बनाने में होता है.

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