सिंगापुर में भारतीय मूल के नागरिक को सजा, पूर्व राष्ट्रपति को मारने की धमकी दी थी
सिंगापुर में एक भारतीय मूल के नागरिक विक्रम हार्वे चोट्टियार को पूर्व राष्ट्रपति हलीमा याकूब को जान से मारने की धमकी मामले में 10 महीने और 12 सप्ताह की जेल की सजा सुनाई गई है। खबर है कि चेट्टियार को राष्ट्रपति हलीमा याकूब के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट करने के आरोप में जेल की सजा सुनाई गई है।
आरोपी ने इंस्टाग्राम पर किया था पोस्ट
मामला है कि आरोपी विक्रम ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में राष्ट्रपति हलीमा याकूब के बारे में कहा था कि उन्हें घसीटकर बाहर निकाला जाना चाहिए और मार दिया जाना चाहिए। विक्रम ने 12 फरवरी को उत्पीड़न के तीन आरोपों में दोषी होने की बात स्वीकार की थी।
बता दें कि विक्रम ने यह पोस्ट 30 अप्रैल, 2023 को की थी, जब वह ड्रग तस्करों की फांसी से परेशान था। सिंगापुर में दोषी ड्रग तस्करों को मौत की सजा दी जाती है और राष्ट्रपति के पास दया की अपील करने का अंतिम अधिकार होता है। विक्रम ने इस पर गुस्से में आकर इंस्टाग्राम पर यह पोस्ट किया था। साथ ही विक्रम ने एक पुलिस अधिकारी से यह भी कहा था कि वह उस समय सुनवाई कर रहे एक न्यायाधीश को चाकू मारना चाहता था।
मानसिक रूप से बीमार होने का दावा निराधार
सुनवाई के दौरान विक्रम ने मानसिक विकारों का दावा किया था, लेकिन सिंगापुर के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान ने उसकी शिकायतों को निराधार पाया। इसके बाद विक्रम को जमानत पर शर्तें लगाई गईं, जिसमें उसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को हटाने और भविष्य में किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई पोस्ट या टिप्पणी न करने की शर्त दी गई थी।
लेकिन इसके बावजूद, विक्रम ने 1 मार्च, 2024 को एक ईमेल भेजा जिसमें न्यायाधीश को हिंसा की धमकी दी गई थी। इसके बाद विक्रम की जमानत रद्द कर दी गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। जहां विक्रम के खिलाफ यह मामला न्यायालय में लंबित था और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अब उसे जेल की सजा सुनाई गई है।
बाद में विक्रम ने ईमेल पर दिया तर्क
विक्रम ने जज को चाकू मारने की धमकी दी थी और एक ईमेल भेजकर जज को हिंसा का शिकार बनाने की बात की थी। इस धमकी के बाद, विक्रम ने दावा किया था कि उसके ईमेल खाते से छेड़छाड़ की गई थी, लेकिन यह झूठा था। इसके बाद, अभियोजन पक्ष ने विक्रम की जमानत रद्द करने के लिए अदालत में आवेदन किया क्योंकि उसने फिर से अपराध किया था।
गौरतलब है कि 18 मार्च, 2024 को विक्रम ने पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवाई, जिसमें उसने कहा कि ईमेल में जो लिखा गया था, वह झूठा था। फिर अदालत ने सुनवाई 22 मार्च, 2024 तक स्थगित कर दी। विक्रम उस तारीख को अदालत में नहीं पहुंचे, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया गया।विक्रम को 5 अप्रैल, 2024 को गिरफ्तार कर लिया गया और अब वह रिमांड पर हैं।

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