सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
नई दिल्ली । लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि चीन अब भी 4,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक भूमि पर कब्जा किए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन दावों को खारिज कर दिया, जबकि सेना ने पीएम मोदी की बात से असहमति जाहिर की है। राहुल गांधी के इन दावों पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताकर कहा कि आप सदन में मनचाही बात नहीं बोल सकते। ये ठीक नहीं है और ये गंभीर विषय है। इसके बाद में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की मांग कर डाली। सांसद दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को प्रस्ताव के लिए चिट्ठी भी लिखी है।
विशेषाधिकार प्रस्ताव पेश करने की वजह क्या होती है
यदि किसी संसद सदस्य को लगता है कि किसी (अन्य) सदस्य की ओर से संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन या दुरुपयोग हुआ है, तब राज्यसभा के सभापति या लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के समक्ष विशेषाधिकार प्रस्ताव के जरिए शिकायत कर सकता है। विशेषाधिकार प्रस्ताव किसी सदस्य की ओर से तब पेश होता है, जब सदस्य को लगता है कि किसी मंत्री या किसी सदस्य ने किसी मामले के तथ्यों को छिपाकर या गलत या विकृत तथ्य देकर सदन या उसके एक या अधिक सदस्यों के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया है।
विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने का मकसद क्या है
विशेषाधिकार प्रस्ताव का उद्देश्य संसद और उसके सदस्यों की गरिमा एवं अधिकारों की रक्षा करना जरुरी है। प्रक्रिया के माध्यम से सांसद सदन के सदस्य, अधिकारी या किसी भी दूसरे व्यक्ति की ओर से किए गए किसी भी इसतरह के कामकाज के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं जिससे संसद के विशेषाधिकारों का उल्लंघन हुआ हो।
ये होते हैं संसदीय विशेषाधिकार, जान लीजिए
संसद में सदस्य को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होती है, संसद या उसकी किसी समिति में किसी सदस्य की ओर से कही गई किसी बात या दिए गए मत के संबंध में किसी भी न्यायालय में किसी भी कार्यवाही से सदस्य को उन्मुक्ति होती है। संसद के किसी भी सदन की ओर से या उसके प्राधिकार के तहत किसी रिपोर्ट, पत्र, मत या कार्यवाही के प्रकाशन के संबंध में किसी व्यक्ति को किसी भी न्यायालय में कार्यवाही से उन्मुक्ति दी जाती है। संसद की कार्यवाही की जांच करने पर न्यायालयों पर प्रतिबंध लगाया जाता है।

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