पहले फ्यूचर को देखते हुए नहीं की शादी, जब करियर में सुधार हुआ तो कोरोना पड़ गया पीछे, अब 22 अप्रैल को होने वाला विवाह कैंसिल

पहले फ्यूचर को देखते हुए 30 वर्ष से ज्यादा हो गए फिर भी शादी नहीं की। जब कैरियर सुधरा तो लगा कि अब शादी करने का समय आ गया है। ऐसे में लगातार दो साल से विवाह का मुहूर्त बनता रहा। शादी के कार्ड भी छपते रहे है। यहां तक की इस वर्ष शादी के कार्ड बंट भी गए। वहीं पैलेस से लेकर बैंड, बाजा और बारात सहित पूरी तैयारियां हो चुकी है। लेकिन 15 अप्रैल से अचानक देश प्रदेश में कोरोना के केसों में हो रही बढ़ोत्तरी को लेकर लॉकडाउन की स्थितियां तैयार हो गई।

ऐसे में 22 अप्रैल को होने वाले विवाह लगभग कैंसिल हो चुके है। इसलिए एक बार फिर रिश्तेदारों को फोन और सोशल मीडिया के माध्यम से मना करना पड़ रहा है कि जहां भी रहे सुरक्षित रहे। अब शादी नहीं हो रही, इसलिए घर मत आए। कोरोना अगर सही हुआ और सब सकुशल रहे तो फिर मिलेगे। शादी भी होगी बरात भी होगी, पर अब ऐसा उत्साह नहीं रहेगा। क्योंकि लगातार दो बार शादी कैंसिल होने से मन टूट चुका है। ये कहना है रीवा शहर के यूनिवर्सिटी रोड में रहने वाले शुक्ला परिवार का।

कहानी 1ः बड़े बेटे की शादी के लिए छोटा बेटा हो गया बेरोजगार

शुक्ल परिवार ने बताया कि कोरोना के कारण एक तरफ घर की जमा पूंजी नष्ट हो गई। वहीं शादी की तैयारी में पहले रीवा में प्लाट खरीदा। फिर मकान बनवाया। जिसको बनवाने में दो साल गुजर गए। एक बेटा सफल हुआ तो उसकी शादी की तैयारी में दूसरा बेटा रोजगार छोड़कर घर बनवाने में लग गया। जब भी विवाह का शुभ मुहूर्त बनता है कोरोना रोड़ा बन जाता है। ब्राम्हणों ​​​​​​ में बिना व्रतबंध के शादी नहीं होती ऐसे में ठंड के दिनों में मुहूर्त ही नहीं मिला। अब अप्रैल मई में शादी की बारी आई तो एक बार फिर कोरोना रोड़ा बन गया। ऊपर से जिला प्रशासन के प्रतिबंध अलग है। ऐसे में फिलहांल नई डेट आने तक शादी टल चुकी है।

पहले निमंत्रण दिया अब कर रहे मना

कोरोना और जिला प्रशासन ने ऐसी जग हंसाई कराई है कि पहले खुद निमंत्रण दो और अब उन्हीं मेहमानों को मना करना पड़ रहा है कि शादी में नहीं आना है। कारण पूछने पर कोरोना जवाब देना पड़ता है।

कहानी 2ः कोरोना के कारण कहीं टूट न जाए बेटी का रिश्ता

रीवा के नेहरू नगर निवासी पटेल परिवार का कहना है कि कोरोना के कारण लगता है कि बेटी का रिश्ता ही टूट जाएगा। ऐसे में मेरी बेटी हाथ पीले करने से वंचित हो जाएगी। हर मां बाप का धर्म होता है कि अपने बेटे व बेटी की शादी धूम धाम से करें। लेकिन दो साल से कोरोना ने मां-बाप का हक ही छीन लिया है। वैसे भी आज कल के लड़के मां बाप के पसंद की शादी नहीं करते, लेकिन जो करना चाह रहे है। उनको कोरोना और जिला प्रशासन की गाइड लाइन नहीं करने दे रही है।

पांच लाख से ज्यादा का नुकसान

बेटी के पिता ने बताया कि शुरुआती दौर में घर का खर्चा लगभग पांच लाख के आसपास है। जिसमे पैलेस का किराया, किराना, सब्जी, डेकोरेशन, जनवासा, ज्वैलरी, हलवाई आदि को एडवांस दिया हुआ है। जो लग्न कैंसिल होने से लगभग मारा जाएगा। क्योंकि पहले लोग मानवता दिखाते हुए मान जाते थे। लेकिन कोरोना ने मानवता को खत्म करा दिया है। जिनके हाथ में पैसा गया वो न अब लौटाने वाले है। न दूसरी बार एडजेस्ट करने के लिए तैयार है। क्योंकि अगर एक बुकिंग में ऐसा होता तो कर देते। लेकिन हर बुकिंग में ऐसा ही हो रहा है। हालांकि उम्मीद है कि कुछ शायद रिटर्न आ जाए। बाकी ईश्वर की मर्जी।